Friday, March 24, 2017

अंधेरा...

डर लगता है,
इस उजालेंसे...
में तो वही ठीक हूं,
जहाँ है घनघोर अंधेरा...

कम से कम आस है,
रोशनी के इक किरण कि...
साथ में तो नही घूमतां,
हर पल एक काला साया...

~ अरुण भऊड

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