Sunday, August 16, 2020

मेरी माँ को मुझसे है, कुछ अलग ही आशा...

 इस  देश को अगर सीमाएं नहीं होती ,

तो क्या मेरी राष्ट्रभक्ति नष्ट हो गयी होती ?

और क्या इस देश का झंडा अपने कुर्ते पे लगाके हि,

में अपने आप को सच्चा राष्ट्रभक्त कहलाऊ ?


कितनी सीमित है मेरी राष्ट्रभक्ति की परिभाषा |

मेरी माँ (धरती) को मुझसे है, कुछ अलग ही आशा ||


क्या पाकिस्तान के नाम से मेरा खून खौल उठे,

तभी में सच्चा हिन्दोस्तानी ?

क्या अपने मोबाइल से टिकटॉक ऍप को डिलीट करू,

तभी में इस माँ का लाल ?


कितनी सीमित है मेरी राष्ट्रभक्ति की परिभाषा |

मेरी माँ को मुझसे है, कुछ अलग ही आशा ||


क्या माथे पे भगवा तिलक लगाने पर ही में सच्चा हिंदू ?

और क्या दाढ़ी नहीं बढाऊ तो में सच्चा मुसलमान नहीं ? 

क्या गले में  क्रॉस पहनने पर ही में सच्चा ईसाई ?

और सिर पे पगड़ी ना पेहनु तो में सीख न कहलाऊ ?


कितनी सीमित है मेरी राष्ट्रभक्ति की परिभाषा |

मेरी माँ को मुझसे है, कुछ अलग ही आशा ||


क्या मासूमोंपर बंदूके चलाने वाला ही केवल, राष्ट्रद्रोही है ?

क्या सिर्फ बम के धमाके करके वाला ही, टेररिस्ट है ?

भ्रष्टाचारसे देश को अंदर से खोख्ला करना राष्ट्रद्रोह नहीं ? 

क्या बंद कमरे में अपने बीवी पे हाथ उठानेवाला राष्ट्रद्रोही नहीं ?


कितनी सीमित है मेरी राष्ट्रभक्ति की परिभाषा |

मेरी माँ को मुझसे है, कुछ अलग ही आशा ||


क्या नैतिकता और  इंसानियत राष्ट्रभक्ति नहीं ?

देश के बाहर रहू, तो क्या में इस देश की संतान नहीं ?

क्या दिखावा ही राष्ट्रभक्ति है और दिखावा करना जरुरी है ?

में फेमस नहीं, तो क्या इस माँ के प्रति मेरे मन में प्यार नहीं ?


कितनी सीमित है मेरी राष्ट्रभक्ति की परिभाषा |

मेरी माँ को मुझसे है, कुछ अलग ही आशा ||


कोई विलक्षण करने की नहीं है आशा, रखो भाईचारा, और बोलो प्रेम की भाषा

सीमाओंके अंदर भी, न बनाओ द्वेष की रेषा, बस इतनीसी उम्मीद करता हू, हे भारतदेशा

कितनी सीमित है मेरी राष्ट्रभक्ति की परिभाषा | मेरी माँ को मुझसे है, कुछ अलग ही आशा ||