इस देश को अगर सीमाएं नहीं होती ,
तो क्या मेरी राष्ट्रभक्ति नष्ट हो गयी होती ?
और क्या इस देश का झंडा अपने कुर्ते पे लगाके हि,
में अपने आप को सच्चा राष्ट्रभक्त कहलाऊ ?
कितनी सीमित है मेरी राष्ट्रभक्ति की परिभाषा |
मेरी माँ (धरती) को मुझसे है, कुछ अलग ही आशा ||
क्या पाकिस्तान के नाम से मेरा खून खौल उठे,
तभी में सच्चा हिन्दोस्तानी ?
क्या अपने मोबाइल से टिकटॉक ऍप को डिलीट करू,
तभी में इस माँ का लाल ?
कितनी सीमित है मेरी राष्ट्रभक्ति की परिभाषा |
मेरी माँ को मुझसे है, कुछ अलग ही आशा ||
क्या माथे पे भगवा तिलक लगाने पर ही में सच्चा हिंदू ?
और क्या दाढ़ी नहीं बढाऊ तो में सच्चा मुसलमान नहीं ?
क्या गले में क्रॉस पहनने पर ही में सच्चा ईसाई ?
और सिर पे पगड़ी ना पेहनु तो में सीख न कहलाऊ ?
कितनी सीमित है मेरी राष्ट्रभक्ति की परिभाषा |
मेरी माँ को मुझसे है, कुछ अलग ही आशा ||
क्या मासूमोंपर बंदूके चलाने वाला ही केवल, राष्ट्रद्रोही है ?
क्या सिर्फ बम के धमाके करके वाला ही, टेररिस्ट है ?
भ्रष्टाचारसे देश को अंदर से खोख्ला करना राष्ट्रद्रोह नहीं ?
क्या बंद कमरे में अपने बीवी पे हाथ उठानेवाला राष्ट्रद्रोही नहीं ?
कितनी सीमित है मेरी राष्ट्रभक्ति की परिभाषा |
मेरी माँ को मुझसे है, कुछ अलग ही आशा ||
क्या नैतिकता और इंसानियत राष्ट्रभक्ति नहीं ?
देश के बाहर रहू, तो क्या में इस देश की संतान नहीं ?
क्या दिखावा ही राष्ट्रभक्ति है और दिखावा करना जरुरी है ?
में फेमस नहीं, तो क्या इस माँ के प्रति मेरे मन में प्यार नहीं ?
कितनी सीमित है मेरी राष्ट्रभक्ति की परिभाषा |
मेरी माँ को मुझसे है, कुछ अलग ही आशा ||
कोई विलक्षण करने की नहीं है आशा, रखो भाईचारा, और बोलो प्रेम की भाषा
सीमाओंके अंदर भी, न बनाओ द्वेष की रेषा, बस इतनीसी उम्मीद करता हू, हे भारतदेशा
कितनी सीमित है मेरी राष्ट्रभक्ति की परिभाषा | मेरी माँ को मुझसे है, कुछ अलग ही आशा ||
Thought-provoking poem! Hope we have more and more people thinking on similar lines.
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