Saturday, January 16, 2016

मेरा कुछ सामान...


"Ijaazat" या सिनेमातील "मेरा कुछ सामान " हे गाणे बऱ्याच लोकांना आठवणीत आहे पण या गाण्यात नसलेले त्या कवितेतील एक कडवं जे  सिनेमात नसिरुद्दीन शाह पत्राद्वारे वाचून दाखवतो, ते मला सगळ्यात जास्त आवडलं!

पहा आठवतय का सिनेमातलं हे कडवं…  :)

इक दफ़ा वो याद है तुमको, बिन बत्ती वो सायकील का चालान हुआ था
हमने कैसे भुखै प्यासे बेचारों सी अक्टिंग कि थी
हवालदार ने उल्टा एक अठन्नी दे कर भेज दिया था
एक चवन्नि मेरी भी है वो भिझ्वा दो
और भी कुछ सामान तुम्हारे पास पडा है वो भिझ्वा दो
                                                                                ~ गुलजार 

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